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Showing posts from January, 2019

क्या कुंभ स्नान करने से पाप धुल जाते हैं?

कुंभ स्नान हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है जिसमें करोड़ों श्रद्धालु कुंभ स्थल हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक में स्नान करते हैं। इनमें से प्रत्येक स्थान पर प्रति बारहवें वर्ष और प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच छह वर्ष के अंतराल में अर्धकुंभ भी होता है। परंतु क्या कुंभ में जाकर स्नान करना हमारे शास्त्रों में वर्णित है? पवित्र श्रीमद भागवत गीता अध्याय 16 के श्लोक 23 में स्पष्ट किया है कि जो शास्त्रविधि को त्यागकर अपनी इच्छा से मनमाना आचरण करते हैं, उनको ना तो सुख होता है, ना उनकी गति होती है और ना ही कोई अन्य लाभ ही मिलता है। कुछ लोग कहते हैं कि कुम्भ में जाकर स्नान करना चाहिए जिससे हमारे पाप धुल जाते हैं और वही लोग स्नान करके वही जल अपने किसी भी पात्र में भर लाते हैं। विचारणीय विषय है कि आप कहते हैं कि कुंभ में स्नान करने से हमारे पाप धुल जाते हैं और जब आप नहा लिए तो फिर वही पापों वाले पानी को फिर आप भरकर ले आये। क्या मतलब रह गया आपका कुम्भ में स्नान करने का? वही पानी घर पर है, वही वहाँ भी, फिर अंतर क्या बचा है दोनों में? आप घर से चले स्नान करने के लिए और आपक...

Kumbh Mela 2019

मानव जीवन अमृत कुंभ है, इसे गलत साधना करके विष न बनाएं सतयुग, त्रेतायुग और द्वापरयुग में कुंभ मेले का आयोजन और डुबकी लगा कर स्नान करने का चलन नहीं था। राक्षसों और देवताओं के अमृत कुंभ/कलश को लेकर हुई खींचातानी में भगवान विष्णु जी ने मोहिनी रूप बनाकर दैत्यों को भ्रमित किया और देवताओं को अमृत कलश दिलाया। दोनों ओर से हुई कलश के लिए खींचातानी में कुछ बूंदें धरती के कुछ क्षेत्रों में गिरी तो कलयुग आने पर कथाओं को लोककथाओं और दंतकथाओं के रूप में प्रस्तुत करके अनेक रूप और प्रारूप बना दिए गए। कुंभ मेले का आयोजन भारत में हरिद्वार, इलाहाबाद (वर्तमान में प्रयागराज), उज्जैन और नासिक में किया जाता है। हर तीन साल बाद कुंभ मेले का स्थान बदल दिया जाता है। यह केवल ज्योतिषीय मान्यता है कि त्रिवेणी संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाकर मनुष्य अपने समस्त पापों को धो सकता है। ज्योतिषों और पंडितों ने समाज में ऐसा भ्रम फैला रखा है कि गंगा में डुबकी लगाने से मनुष्य और उसके पूर्वज दोषमुक्त हो जाते हैं। यदि ऐसा है तो फिर पंडित पूर्वजों के नाम पर प्रतिवर्ष श्राद्ध क्यों निकलवाते हैं? आप स्वयं विचार कीजिए कि ...

70 वां गणतंत्र दिवस (70th Republic day of India) (26 जनवरी 2019)

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S A NEWS ,  2 hours ago    10 min    234     नमस्कार दोस्तों! 26 जनवरी, 2019 को भारत का 70वां गणतंत्र दिवस (Republic day 2019) मनाया जाएगा। आज हम बात करेंगे भारत देश के संविधान के बारे में कि ये कब लागू हुआ? इसे बनने में कितना समय लगा? कितने अधिकारियों ने संविधान के अनुसार काम किया और क्या हमारा देश वर्तमान में संविधान के अनुसार चल रहा है? डॉ भीमराव आंबेडकर जी (DR. BR Ambedkar) की अध्यक्षता में 09 दिसंबर, 1946 को संविधान बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई और अंततः 26 नवंबर, 1950 को हमारे देश का संविधान बनकर तैयार हुआ। इस तरह हमारे देश के संविधान को बनाने में 02 वर्ष, 11 महीने, 18 दिन का समय लगा और इस संविधान को 26 जनवरी 1950 को सम्पूर्ण भारत में लागू किया गया। भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान है। कुछ समय तक तो इस संविधान का पालन किया गया लेकिन वर्तमान में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। वर्तमान में कुछ ही अधिकारी भारत के संविधान का पूर्ण रूप से पालन कर रहे हैं, बाकी सभी तो केवल औपचारिकता ही निभा रहे हैं। वर्तमान में भ्रष्टाचार (...